पीएयू में उन्नत मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, उद्यमिता और उत्पादन बढ़ाने पर जोर

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Dr Rupinder Kaur Toor telling about the various trainings being oraganized by SDC, PAU Ludhiana
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लुधियाना, 17 सितंबर 2026: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के कीट विज्ञान विभाग ने कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) के सहयोग से 14 और 15 सितंबर, 2026 को उन्नत मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इंडिया हनी एलायंस (आईएचए) द्वारा प्रायोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण का विषय “प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों में उद्यमिता विकसित करना, मधुमक्खी कॉलोनी की गुणवत्ता में सुधार तथा छत्ता और फसल उत्पादकता बढ़ाना” रहा।

कार्यक्रम के दौरान मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीकों, रानी मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन और विपणन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई।

तकनीकी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील

प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए पीएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एम.एस. भुल्लर ने विश्वविद्यालय के निदेशालय द्वारा संचालित विभिन्न विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने मधुमक्खी पालकों से विशेषज्ञों द्वारा दिए गए तकनीकी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की, ताकि मधुमक्खी छत्तों की उत्पादकता और किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके।

उन्होंने प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की ओर से निरंतर तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी दिया।

कीट विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. मनमीत बराड़ भुल्लर ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला में पहला है। इसका उद्देश्य मधुमक्खी पालकों को बड़े स्तर पर रानी मधुमक्खी पालन की तकनीकों में दक्ष बनाना तथा छत्तों और फसलों की उत्पादकता बढ़ाना है।

कोर्स निदेशक डॉ. जसपाल सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में कुल 23 मधुमक्खी पालकों ने भाग लिया, जिनमें 11 महिलाएं शामिल थीं।

रानी मधुमक्खी पालन और शहद प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उन्नत रानी मधुमक्खी पालन तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। इसमें मधुमक्खी के मोम से सेल कप तैयार करना, रानी मधुमक्खी पालन के लिए फ्रेम बनाना, लार्वा ग्राफ्टिंग और कपकिट (Cupkit) प्रणाली का उपयोग करना शामिल रहा।

इसके अलावा, मधुमक्खी पालकों को शहद के प्रसंस्करण, बोतलबंदी और आकर्षक एवं नवाचारपूर्ण पैकेजिंग के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया।

प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण मधुमक्खी उत्पादों के उत्पादन, विपणन, गुणवत्ता आश्वासन और प्रमाणन से संबंधित जानकारी भी प्रदान की गई।

एफपीओ, स्वयं सहायता समूह और शहद निर्यात पर चर्चा

कार्यक्रम में मधुमक्खी पालकों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के गठन, शहद निर्यात की संभावनाओं तथा बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त करने के तरीकों के बारे में जागरूक किया गया।

इसके साथ ही मधुमक्खियों को कीटनाशकों के विषैले प्रभाव और छोटे छत्ता भृंग (Small Hive Beetle) के प्रकोप से बचाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

पीएयू के कौशल विकास केंद्र की एसोसिएट निदेशक डॉ. रुपिंदर कौर तूर ने केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों से इन कार्यक्रमों के बारे में संभावित प्रशिक्षणार्थियों को भी जागरूक करने का आग्रह किया।

गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन पर जोर

इंडिया हनी एलायंस की निदेशक सुश्री नम्रता खन्ना ने मधुमक्खी पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए संगठन की भूमिका और विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईएचए विभिन्न राज्यों के मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी पालन से जुड़ी नवीनतम जानकारी और आधुनिक तकनीकों तक पहुंच बनाने में सहयोग कर रहा है।

डाबर के एसोसिएट मैनेजर श्री विक्रम सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे मधुमक्खी पालकों को बाजार में अपने उत्पादों के बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. रूपिंदर कौर तूर, डॉ. अमित चौधरी, डॉ. भारती मोहिंद्रू और डॉ. लवलीश गर्ग द्वारा किया गया।

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