आईएसबी लीडरशिप समिट 2026: भारत की अगली बड़ी छलांग के लिए युवाओं और कॉरपोरेट जगत को आगे आना होगा – मनीष तिवारी

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मोहाली: पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि भारत को आर्थिक विकास के अगले स्तर तक ले जाने के लिए युवाओं और कॉरपोरेट जगत को आगे आकर प्रयास करने होंगे। उभरती तकनीकों में देश की क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी निवेश और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति भी जरूरी है।

तिवारी रविवार को मोहाली स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) परिसर में आयोजित आईएसबी लीडरशिप समिट 2026 में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था, भू-राजनीतिक समीकरणों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की भूमिका और भविष्य की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाने की जरूरत

तिवारी ने कहा कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच दुनिया में व्यापक बदलाव आए हैं। इन्हीं बदलावों ने उन्हें अपनी पुस्तक ‘The World Adrift’ लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बिजनेस के विद्यार्थियों को भी वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को समझना चाहिए, क्योंकि इनका प्रभाव न केवल उनके कार्यजीवन, बल्कि एक सभ्यता के रूप में हमारे भविष्य पर भी पड़ता है।

उन्होंने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति से जुड़ी तकनीकों में भारत अभी अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाया है। इसकी वजह प्रतिभा या क्षमता की कमी नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में पर्याप्त पूंजी निवेश का अभाव है।

अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे ऐतिहासिक स्तर की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना बताया। उन्होंने कहा कि चीन भी सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और तकनीकी क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। भारत को उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना होगा।

विकास के लिए बहुदलीय सहमति पर जोर

तिवारी ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश अपनी बातों को वास्तविक कार्यों में बदले। इसके लिए राजनीतिक दलों के बीच बहुदलीय सहमति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा ध्रुवीकृत माहौल में ऐसी सहमति के बिना भारत को विकास के अगले स्तर तक ले जाने का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है।

उन्होंने वर्ष 1991 के आर्थिक बदलावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय प्रधानमंत्री और तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में देश की आर्थिक दिशा को लेकर व्यापक सहमति बनी थी। उनके अनुसार, यह सहमति 1991 से 2026 तक विभिन्न सरकारों के दौरान बनी रही और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की रचनात्मक ऊर्जा को आगे बढ़ने का अवसर मिला। इसका लाभ बड़ी संख्या में लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में भी सामने आया।

युवाओं से नीति-निर्माण में योगदान देने की अपील

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए तिवारी ने कहा कि आने वाले समय में उनमें से कई लोग नीति-निर्माण और नेतृत्व की भूमिकाओं में होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए सहमति आधारित सिद्धांतों के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि भारत को आगे ले जाने के प्रयास केवल शीर्ष स्तर से नहीं आने चाहिए, बल्कि युवा भारतीयों और कॉरपोरेट जगत को भी इसमें सक्रिय योगदान देना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि वे ऐसी दुनिया में अपना भविष्य बना रहे हैं, जो 45 साल पहले उनके लॉ स्कूल पूरा करने के समय की दुनिया से कहीं अधिक जटिल है।

तिवारी ने कहा कि देश के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान खोजने और लोगों के भरोसे पर खरा उतरने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

पुस्तक पर चर्चा में भी लिया हिस्सा

समिट के दौरान मनीष तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘A World Adrift: A Parliamentarian’s Perspective on Global Power Dynamics’ पर आयोजित चर्चा में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आईएसबी के बौद्धिक रूप से सक्रिय समुदाय के साथ विचार साझा करना और नेतृत्व, सार्वजनिक नीति तथा आधुनिक दुनिया को आकार देने वाली ताकतों पर चर्चा करना उनके लिए गर्व की बात है।

तिवारी ने आईएसबी की सराहना करते हुए कहा कि यह एक शानदार संस्थान है और उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा भी है। उन्होंने बताया कि आईएसबी श्री आनंदपुर साहिब संसदीय क्षेत्र में आता है, जिसका उन्होंने 2019 से 2024 तक प्रतिनिधित्व किया था।

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