पीएयू किसान मेले का समापन: किसानों की खुशहाली और जल संरक्षण पर रहा जोर

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लुधियाना, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। मेले के अंतिम दिन किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पराली प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

मेले का आयोजन पीएयू के निदेशालय विस्तार शिक्षा की ओर से “कृषि आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती अपनाएं” विषय के तहत किया गया। इसमें किसानों को वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, कृषि उद्योग प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला।

किसानों को अधिक मुनाफे वाली फसलें अपनाने की सलाह

समापन समारोह में पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन सरदार हरचंद सिंह बरसट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ पीएयू के कुलपति सुखजीत पाल सिंह, आईएएस और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। अतिथियों ने कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी और खेतों में लगाए गए प्रदर्शन स्टॉलों का दौरा किया तथा किसानों और वैज्ञानिकों से बातचीत की।

किसानों को संबोधित करते हुए हरचंद सिंह बरसट ने कृषि क्षेत्र में पीएयू के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नई फसल किस्में विकसित करने के साथ-साथ किसानों को ऐसी तकनीकें उपलब्ध करा रहा है, जिनसे खेती को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

उन्होंने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने अधिक किसानों तक नहरी पानी से सिंचाई की सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया है, जिससे भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। उन्होंने किसानों से पानी का उचित इस्तेमाल करने और धान की पराली न जलाने की अपील की।

बरसट ने किसानों को अधिक व्यावसायिक मूल्य वाली फसलों की ओर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सही तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर खेती से बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से डेयरी फार्मिंग, सूअर पालन, बकरी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे व्यवसाय अपनाकर परिवार की आय बढ़ाने का आह्वान किया।

धान की सीधी बिजाई और पराली प्रबंधन पर जोर

पीएयू के कुलपति सुखजीत पाल सिंह ने किसानों से मेले में मिली जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और तकनीकों को अपने खेतों में लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सफल खेती के लिए सही फसल, सही किस्म, सही समय और सही तकनीक का चयन जरूरी है।

उन्होंने भूजल स्तर में गिरावट रोकने के लिए धान की सीधी बिजाई (DSR) को पानी बचाने वाली महत्वपूर्ण तकनीक बताया। साथ ही उन्होंने धान की पराली को कचरा नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन मानने की अपील की।

कुलपति ने किसानों को खेत में ही फसल अवशेषों के प्रबंधन के साथ-साथ बायोगैस उत्पादन और पराली की गांठें बनाने जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि फसल अवशेषों से आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सके।

किसान केवल उत्पादक नहीं, उद्यमी भी बनें: कुलपति

कुलपति ने किसानों से प्राथमिक उत्पादक की भूमिका से आगे बढ़कर उद्यमी बनने की दिशा में कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और सीधे विपणन के माध्यम से किसान खेत से बाजार तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकते हैं और उत्पादों के मूल्य में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने ग्रामीण युवाओं और किसानों को ड्रोन जैसी उभरती कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर किसान मेले से बीज के साथ कम से कम एक नया विचार लेकर जाए और उसे अपने खेत में लागू करे।

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद जरूरी

पीएयू प्रबंधन बोर्ड के सदस्य डॉ. डी.एस. चीमा ने किसान मेलों की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान की प्राथमिकताएं खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा तक पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि पीएयू के वैज्ञानिकों ने पंजाब के किसानों के साथ मिलकर कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने किसानों को निजी कंपनियों के अप्रमाणित दावों से सावधान रहने और विश्वसनीय हाइब्रिड बीज खरीदने की सलाह दी। उन्होंने इच्छुक किसानों को विश्वविद्यालय से तकनीकी जानकारी लेकर हाइब्रिड बीज उत्पादन जैसे कार्यों से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

डॉ. चीमा ने कहा कि किसानों को अपने खेतों के अनुभव और समस्याएं वैज्ञानिकों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि अनुसंधान कार्यक्रमों में वास्तविक जरूरतों को शामिल किया जा सके।

गेहूं की किस्म PBW 826 ने पंजाब में 48 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र घेरा

पीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह धट्ट ने कृषि अनुसंधान की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य की खेती में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावी विपणन व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने बताया कि पीएयू की गेहूं किस्म PBW 826 ने पंजाब में गेहूं के कुल क्षेत्रफल के 48 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर जगह बनाई है। उन्होंने दलहन, सरसों, चारा और सब्जियों की फसलों के साथ-साथ उत्पादन एवं पौध संरक्षण तकनीकों में विश्वविद्यालय की प्रगति का भी उल्लेख किया।

धान की कटाई का मौसम नजदीक आने के मद्देनजर उन्होंने पराली जलाने से बचने की अपील की। उन्होंने बताया कि खेतों में फसल अवशेषों को बनाए रखने और उनका उचित प्रबंधन करने से चार से पांच वर्षों की अवधि में मिट्टी की सेहत में सुधार हो सकता है।

कृषि में कौशल विकास और अतिरिक्त आय के स्रोत जरूरी

पीएयू के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. एम.एस. भुल्लर ने कहा कि खेती की चुनौतियों का समाधान केवल अधिक कृषि इनपुट इस्तेमाल करने से नहीं होगा। किसानों को अपने कौशल बढ़ाने, वैज्ञानिक सलाह के आधार पर तकनीक चुनने और अतिरिक्त आय के लिए सहायक व्यवसायों की ओर भी ध्यान देना होगा।

उन्होंने बताया कि पीएयू के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और विस्तार नेटवर्क राज्यभर में किसानों को वैज्ञानिक सिफारिशों को खेतों में लागू करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं।

पहले दिन 1.30 लाख से अधिक किसानों ने लिया हिस्सा

पीएयू के अतिरिक्त निदेशक संचार डॉ. टी.एस. रियार ने बताया कि किसान मेले के पहले दिन 1.30 लाख से अधिक किसानों ने भाग लिया, जबकि दूसरे दिन 80 हजार से अधिक किसान पहुंचे। पहले दिन ही लगभग 3,000 क्विंटल बीज की बिक्री हुई।

उन्होंने कहा कि किसानों की बड़ी भागीदारी विश्वविद्यालय के प्रति उनके विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि जहां आवश्यक हो, वहां अपने खेतों से नहरी पानी की पाइपलाइन बिछाने में सहयोग करें, ताकि सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता कम की जा सके।

डॉ. रियार ने कहा कि किसान केवल कृषि तकनीकों के लाभार्थी नहीं, बल्कि अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के सक्रिय भागीदार भी हैं। किसानों के अनुभव और समस्याएं वैज्ञानिकों तक पहुंचना जरूरी है।

फसल प्रतियोगिताओं में विजेता किसानों का सम्मान

किसान मेले के समापन समारोह में विभिन्न फसलों की उपज प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।

फसलप्रथम स्थानद्वितीय स्थान
प्याजबलबीर सिंहबलराज सिंह
लहसुनहरजोत सिंहबलबीर सिंह बराड़
करेलाकुलदीप सिंहहरप्रीत सिंह (दलिप सिंह के पुत्र)
तोरईहरप्रीत सिंह (चन्नन सिंह के पुत्र)परमजीत सिंह
मिर्चसरबजीत सिंहतीरथ सिंह कहलोन
बैंगनबलबीर सिंह (नंद लाल सिंह के पुत्र)करमजीत सिंह
हल्दीसुखवीर सिंह—

इसके अलावा स्पंज लौकी में शिव सिंह, लंबी लौकी में अमृत सिंह, अमरूद में अनिरुद्ध कुमार, किन्नू में करनजीत सिंह और पपीते में अमनजोत कौर ने प्रथम स्थान हासिल किया। विभिन्न अन्य श्रेणियों में भी किसानों को सम्मानित किया गया।

कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी में उत्कृष्ट स्टॉलों को पुरस्कार

प्रदर्शनी में सात श्रेणियों के सर्वश्रेष्ठ स्टॉलों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।

  • ट्रैक्टर, कंबाइन, रीपर, थ्रेशर और स्वचालित कृषि उपकरण: के.एस. एग्रीकल्चरल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, दिलावरगढ़, मलेरकोटला।
  • ट्रैक्टर से चलने वाले कृषि उपकरण: गुरबाज फार्म मशीनरी प्राइवेट लिमिटेड, अमनपुरा, पटियाला।
  • इलेक्ट्रिक मोटर, इंजन, पंपिंग सेट, औजार और स्प्रेयर: स्प्रे मैन पावर प्रोडक्ट्स, लुधियाना।
  • जल संरक्षण उपकरण: नेटाफिम इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड, लुधियाना।
  • कृषि प्रसंस्करण मशीनरी: के.सी. मार्केटिंग कंपनी, लुधियाना।
  • उर्वरक: चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड, लुधियाना।
  • कीटनाशक: बायर क्रॉप साइंस, चंडीगढ़।

समारोह के अंत में पीएयू के अतिरिक्त निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. टी.एस. ढिल्लों ने अतिथियों, किसानों, महिला किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विस्तार कर्मियों और प्रदर्शकों का धन्यवाद किया।

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