किसानों ने मशरूम उत्पादन का लिया प्रशिक्षण
लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. मखन सिंह भुल्लर के मार्गदर्शन में कौशल विकास केंद्र की ओर से किसानों और किसान महिलाओं के लिए मशरूम उत्पादन विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पीएयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में पंजाब के विभिन्न जिलों से 68 किसानों और किसान महिलाओं ने हिस्सा लिया।
कौशल विकास की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुपिंदर कौर ने प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान हासिल ज्ञान का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और सेवाओं की जानकारी भी दी।
कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवीर कौर ने कहा कि खेती की बदलती जरूरतों को देखते हुए किसान और किसान महिलाएं मशरूम उत्पादन के माध्यम से अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने खेती के साथ सहायक व्यवसायों को अपनाकर कृषि आय बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। वहीं, कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. लवलीश गर्ग ने किसानों को ऑयस्टर मशरूम की खेती के माध्यम से आय बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. शिवानी शर्मा ने मशरूम के महत्व और केसिंग मिट्टी तैयार करने की विधि के बारे में जानकारी दी। डॉ. जसप्रीत कौर और डॉ. अन्ना गोयल ने किसानों को कंपोस्ट तैयार करने, मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों तथा उचित वातावरण में विभिन्न प्रकार के मशरूम की खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इसमें स्ट्रॉ मशरूम, मिल्की मशरूम, ऑयस्टर मशरूम और शिटाके मशरूम की खेती शामिल रही। प्रशिक्षण के दौरान कंपोस्ट और केसिंग मिट्टी तैयार करने के साथ मशरूम स्पॉनिंग का भी व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
प्रोसेसिंग एवं फूड इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. गुरवीर कौर ने मशरूम के प्रसंस्करण की जानकारी दी। एंटोमोलॉजी विभाग की डॉ. अनुरीत कौर चांडी ने मशरूम में लगने वाले कीटों और उनके प्रबंधन के बारे में बताया। नेमाटोलॉजिस्ट डॉ. सुखजीत कौर ने मशरूम को प्रभावित करने वाले नेमाटोड, उनके नियंत्रण और कीटनाशकों के उचित उपयोग संबंधी जानकारी दी।
फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की डॉ. सोनिका शर्मा ने मशरूम के पोषण संबंधी महत्व, दैनिक आहार में इसकी उपयोगिता और मशरूम से तैयार होने वाले विभिन्न व्यंजनों के बारे में जानकारी दी।
कौशल विकास केंद्र के डॉ. करणवीर गिल ने पंजाब एग्रीबिजनेस इनक्यूबेटर के बारे में विस्तृत जानकारी दी। पंजाब सरकार के बागवानी विभाग की डॉ. गुरप्रीत कौर ने मशरूम उत्पादन को व्यवसाय के रूप में शुरू करने के लिए उपलब्ध विभिन्न सब्सिडी योजनाओं और सरकारी सेवाओं के बारे में प्रतिभागियों को अवगत करवाया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर डॉ. प्रेरणा कपिला ने सभी प्रतिभागियों और विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल को अपने व्यवसाय और खेती में लागू करने का आह्वान किया।
