ICAR-IIMR का बड़ा कदम, किसानों तक पहुंचेंगे उन्नत हाइब्रिड मक्का बीज
मक्के की खेती को मिलेगी नई रफ्तार, उन्नत हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी
लुधियाना, 26 सितंबर। मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों तक बेहतर गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों की पहुंच मजबूत करने की दिशा में ICAR-Indian Institute of Maize Research (ICAR-IIMR), लुधियाना ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान ने 21 सितंबर 2026 को विभिन्न सीड कंपनियों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन करारों के जरिए अधिक उपज क्षमता वाले मक्का हाइब्रिड की बीज उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
संस्थान ने Vistha Seeds Pvt. Limited, Hyderabad के साथ LQMH 1, IQMH 209 और IMH 234 के हाइब्रिड बीज उत्पादन एवं विपणन के लिए समझौता किया है।
इनमें LQMH 1 और IQMH 209 बायोफोर्टिफाइड हाइब्रिड हैं। इन्हें उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र के लिए जारी किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।
वहीं IMH 234 को उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है। इसके दायरे में बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं।
दूसरे सीड संस्थान से भी हुआ करार
ICAR-IIMR ने Sri Krishna Seeds, Kurnool, Andhra Pradesh के साथ भी समझौता किया है। इसके तहत IQMH 214 और IMH 234 के बीज उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा।
IQMH 214 को प्रायद्वीपीय क्षेत्र के साथ-साथ मध्य-पश्चिमी क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है। इस क्षेत्र में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
बायोफोर्टिफाइड हाइब्रिड में पोषण और उत्पादन दोनों पर जोर
ICAR-IIMR के अनुसार IQMH 209, IQMH 214 और LQMH 1 बायोफोर्टिफाइड हाइब्रिड हैं। इनमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन जैसे आवश्यक अमीनो एसिड की मात्रा अधिक है। साथ ही इनमें प्रमुख कीटों के प्रति सहनशीलता और अधिक अनाज उत्पादन की क्षमता भी मौजूद है।
संस्थान और सीड कंपनियों के बीच हुए ये समझौते शोध संस्थान में विकसित उन्नत मक्का तकनीक को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बेहतर हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त विकल्प मिलने की संभावना है।
एथेनॉल से पोल्ट्री तक बढ़ेगा फायदा
मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। मक्के की अधिक उपलब्धता से इससे जुड़े एथेनॉल, खाद्य प्रसंस्करण और पोल्ट्री उद्योग जैसे डाउनस्ट्रीम सेक्टर को भी लाभ मिल सकता है।
ICAR-IIMR की यह व्यावसायीकरण पहल संस्थान में विकसित हाइब्रिड तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की दिशा में एक कदम है, जिससे आने वाले समय में मक्का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
