PAU ने गेंदे के फूलों की पैकेजिंग तकनीक के लिए जम्मू की फर्म से किया समझौता
लुधियाना, 21 सितंबर 2026। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना ने गेंदे के फूलों की पैकेजिंग तकनीक के लाइसेंस के लिए जम्मू स्थित फर्म मॉर्निंग पेटल्स (Morning Petals LLP) के साथ समझौता किया है। इस समझौते का उद्देश्य गेंदे के फूलों की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने के साथ-साथ उनके भंडारण, परिवहन और विपणन को बेहतर बनाना है।
पीएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट और मॉर्निंग पेटल्स एलएलपी की श्रीमती साक्षी शर्मा ने अपनी-अपनी संस्थाओं की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान (कृषि एवं बागवानी) डॉ. वी.एस. सोहू, अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान (कृषि इंजीनियरिंग) डॉ. महेश कुमार, डॉ. खुशदीप धर्नी, एसोसिएट डायरेक्टर, टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइजेशन सेल, डॉ. तरसेम चंद मित्तल, प्रमुख, प्रसंस्करण एवं खाद्य इंजीनियरिंग विभाग तथा डॉ. परमिंदर सिंह, प्रमुख, पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केपिंग विभाग भी उपस्थित रहे।
डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने इस उपयोगी तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए संबंधित विभागों और वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी।
गेंदे के फूलों की शेल्फ लाइफ 6 से बढ़कर 16 दिन तक
प्रसंस्करण एवं खाद्य इंजीनियरिंग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. प्रीतइंदर कौर ने बताया कि पीएयू ने गेंदे के खुले फूलों के लिए बेहतर पैकेजिंग तकनीक विकसित की है। इसका उद्देश्य फूलों को लंबे समय तक ताजा रखना और उनके भंडारण, परिवहन तथा खुदरा विपणन को आसान बनाना है।
उन्होंने बताया कि गेंदे के फूलों की खुली संरचना के कारण परिवहन और भंडारण के दौरान उनकी ताजगी एवं गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। कटाई के बाद फूलों में नमी की कमी, मुरझाने, रंग में बदलाव और खराब होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए विकसित वैज्ञानिक पैकेजिंग तकनीक से सामान्य पर्यावरणीय परिस्थितियों में गेंदे के फूलों की शेल्फ लाइफ छह दिन से बढ़ाकर 16 दिन तक की जा सकती है। इससे फूलों को अधिक समय तक सुरक्षित रखने और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर जोर
डॉ. खुशदीप धर्नी ने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकें फसल कटाई के बाद उपज के संरक्षण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान प्रदान कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी तकनीकों के व्यावसायीकरण से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके बेहतर विपणन के अवसर बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
