पीएयू के छात्रों ने किसान मेले में निकाली जागरूकता रैली, वैज्ञानिक खेती का दिया संदेश

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लुधियाना, 18 सितंबर 2026। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना में 18 और 19 सितंबर को आयोजित किए जा रहे किसान मेले के दौरान कृषि विज्ञान एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता रैली निकाली गई। पीएयू के विस्तार शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस रैली में बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर के करीब 200 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। ये विद्यार्थी ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत किसानों को जागरूक करने के लिए शामिल हुए।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

किसान मेले की थीम “वਿਗਿਆਨਕ ਢੰਗ ਅਪਣਾਓ, ਖੇਤੀ ਆਮਦਨ ਵਧਾਓ” (वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, खेती की आमदनी बढ़ाएं) पर आधारित इस रैली का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

विद्यार्थियों ने रैली के माध्यम से संदेश दिया कि वैज्ञानिक खेती से न केवल कृषि उत्पादन और किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है, बल्कि मिट्टी, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है। टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाकर कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कृषि विशेषज्ञों ने दिखाई हरी झंडी

रैली को कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के डीन डॉ. सी.एस. औलख और पीएयू के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. एम.एस. भुल्लर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान विद्यार्थियों ने जागरूकता संदेशों वाली तख्तियां हाथों में लेकर वैज्ञानिक खेती, टिकाऊ कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के उचित इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में नारे लगाए।

किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना जरूरी: डॉ. औलख

इस अवसर पर डॉ. सी.एस. औलख ने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान किसानों तक ऐसे तरीके से पहुंचना चाहिए, जिसे वे आसानी से समझ सकें और खेतों में लागू कर सकें। उन्होंने रैली में विद्यार्थियों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को कृषि विस्तार शिक्षा का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं और उन्हें सीधे किसानों के साथ जुड़ने का अवसर देती हैं।

टिकाऊ खेती के लिए संसाधनों का उचित प्रबंधन जरूरी

डॉ. एम.एस. भुल्लर ने मौजूदा कृषि परिदृश्य में किसान मेले की थीम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सिफारिशों को अपनाने और कृषि संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने से किसानों को उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही मिट्टी, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने किसानों में जागरूकता फैलाने के लिए विस्तार शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों की भागीदारी से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

विद्यार्थियों को किसानों की समस्याएं समझने के लिए किया प्रेरित

विस्तार शिक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. वी.के. रामपाल ने विद्यार्थियों को RAWE कार्यक्रम के अनुभव का उपयोग किसानों की समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक कृषि सिफारिशों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि विस्तार शिक्षा केवल जानकारी प्रसारित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें किसानों के साथ सार्थक संवाद करना और उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी शामिल है। इससे टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

रैली का समन्वय विस्तार शिक्षा की प्रोफेसर डॉ. मनमीत कौर और विस्तार वैज्ञानिक डॉ. लखविंदर कौर ने किया। इस रैली के माध्यम से RAWE विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप से लागू करने और किसानों के बीच वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर मिला।

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