कक्षा से खेत तक पहुंची पढ़ाई, कृषि की नई राह से रूबरू हुए सिरमौर के विद्यार्थी
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय तथा उच्चतर शिक्षा निदेशालय, शिमला द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जिला सिरमौर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बागवानी, उद्यान प्रबंधन, पुष्प उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से व्यावहारिक रूप से परिचित करवाना तथा उनके ज्ञान एवं कौशल का विकास करना रहा।
कार्यक्रम में जिला सिरमौर के 10 विद्यालयों—वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खूड, कोटला बड़ोग, सैंज, बसांहा, चांदनी, जामू कोटी, करोग, हलां, मिलां तथा करोग—से 142 विद्यार्थियों ने अपने अध्यापकों एवं प्रभारी शिक्षकों के साथ भाग लिया। तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 7 सितंबर से हुई।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को हाई-टेक फ्लोरीकल्चर, आधुनिक सिंचाई प्रणालियों, प्राकृतिक खेती, जीवामृत एवं घनजीवामृत, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन, संरक्षित खेती, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन, आधुनिक पौधशाला तकनीक, फल फसलों में प्रवर्धन तथा प्लांट टिश्यू कल्चर जैसे विषयों पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न कृषि एवं बागवानी आधारित इकाइयों का एक्सपोजर विजिट कर आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें समझने का अवसर मिला कि आधुनिक कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी नवाचार, मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण, उद्यमिता एवं रोजगार की व्यापक संभावनाएं भी हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालयों के अध्यापकों, प्रभारी शिक्षकों एवं कार्यक्रम समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मीनु गुप्ता एवं डॉ. मनिका तोमर तथा प्रशिक्षण संयोजक डॉ. प्रीति शर्मा ने संबंधित विद्यालयों एवं प्रतिभागियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता, कार्यक्रम की समयबद्धता, एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था तथा विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया।
विद्यालयों के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों के साथ रहकर उनकी गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित की और प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को विद्यालय स्तर पर आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. धर्म पाल शर्मा ने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। कृषि एवं बागवानी जैसे व्यापक संभावनाओं वाले क्षेत्रों में विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही व्यावहारिक अनुभव और कौशल प्रदान करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें उद्यमिता, नवाचार और स्वरोजगार की सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समग्र शिक्षा एवं उच्चतर शिक्षा निदेशालय के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्कूल से कार्यक्षेत्र तक सफल संक्रमण के लिए तैयार करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
निदेशक विस्तार शिक्षा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय, विद्यालयों, कार्यक्रम समन्वयकों, अध्यापकों एवं विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के अनुभवात्मक एवं कौशल-आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उच्चतर शिक्षा निदेशालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रायोजित यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की शिक्षा से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक एवं कौशल-आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की वास्तविक कार्यप्रणाली से जोड़ने तथा उन्हें भविष्य की कौशल एवं रोजगार आवश्यकताओं के लिए तैयार करने में सार्थक भूमिका निभाएगा।

