चंडीगढ़ में सजी ‘महफिल-ए-म्यूजिक’, गायकों ने बांधा समां
सरगम सोसाइटी की ‘महफिल-ए-म्यूजिक’ में सजी सुरों की शाम, गायकों ने बांधा समां
चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से हुआ आयोजन, लता मंगेशकर और जगजीत सिंह के सदाबहार गीतों ने संगीत प्रेमियों को किया मंत्रमुग्ध
चंडीगढ़, 19 अक्टूबर। सरगम सोसाइटी ने चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से संगीत कार्यक्रम ‘महफिल-ए-म्यूजिक’ का आयोजन किया। इस संगीतमय शाम में कलाकारों ने लता मंगेशकर, जगजीत सिंह और चित्रा सिंह के लोकप्रिय गीतों एवं गजलों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में भक्ति संगीत, सदाबहार गीतों और गजलों का सुंदर संगम देखने को मिला।
पवित्र नवरात्रों के अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत माता रानी के दो भक्ति गीतों ‘मेरे कंठ बसो महारानी’ और ‘जगदीश्वरी सर्वेश्वरी’ से हुई। सुप्रसिद्ध गायिका डॉ. कोमल चुघ ने अपनी मधुर आवाज में इन गीतों की प्रस्तुति दी। इसके बाद सुशील नागपाल ने जगजीत सिंह का लोकप्रिय गीत ‘कौन आएगा यहाँ’ प्रस्तुत किया।
सुशील नागपाल ने गायिका प्रियंका के साथ ‘गम का खजाना तेरा भी है मेरा भी’ और ‘पहले तो अपने दिल की लगी जान जाइये’ जैसे युगल गीत गाकर समां बांध दिया। प्रियंका ने चित्रा सिंह की गजल ‘कभी तो खुल के बरस’ की खूबसूरत प्रस्तुति देकर श्रोताओं की सराहना हासिल की।
कार्यक्रम में युवा गायन प्रतिभाओं ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायिका और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़, जिन्हें सुखी बराड़ के नाम से जाना जाता है, के नेतृत्व में अकादमी युवा गायकों को प्रशिक्षित कर उनकी प्रतिभा को निखारने का काम कर रही है।
इसी क्रम में अकादमी की प्रशिक्षित गायिका सुखमनी ने ‘मंजिल ना दे चिराग ना दे हौसला तो दे’ गाकर अपनी प्रस्तुति दी। प्रतिभाशाली गायिका जसरीत ने ‘वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी’ गीत पेश किया, जबकि ममता गैरी चावला ने ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’ गाकर अपनी गायन प्रतिभा का परिचय दिया।
कम समय में संगीत प्रेमियों के बीच अपनी पहचान बना रही किशोर गायिका नैन्सी ने लता मंगेशकर की प्रसिद्ध गजल ‘रस्म-ए-उल्फत को निभाएं तो निभाएं कैसे’ प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सिटीजन अवेयरनेस ग्रुप के अध्यक्ष सुरिंदर वर्मा ने आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगीत दिलों, भावनाओं और पीढ़ियों को जोड़ने वाला शाश्वत सेतु है। लता मंगेशकर की मधुर धुनें और जगजीत सिंह की दिल को छू लेने वाली गजलें भारतीय संगीत विरासत का अमूल्य हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की संगीतमय शामें महान कलाकारों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनकी विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ‘महफिल-ए-म्यूजिक’ भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा और उससे जुड़ी भावनाओं का उत्सव मनाने वाली सराहनीय पहल है।
कार्यक्रम में प्रस्तुत भक्ति गीतों, सदाबहार नगमों और गजलों ने संगीत प्रेमियों को यादगार शाम का अनुभव कराया। आयोजन के माध्यम से भारतीय संगीत की विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी की गायन प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने का संदेश भी दिया गया।
