प्रतिकूल परिस्थितियों से अवसर तक: PAU के NIDHI-TBI के सहयोग से किसान तलाश रहे खेती के नए रास्ते

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“जहां चाह, वहां राह” कहावत संगरूर जिले के गांव संगतपुर के किसान करमजीत सिंह की प्रेरणादायक कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अंजीर की फसल को खराब मौसम के कारण नुकसान पहुंचने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय खेती में नए विकल्प तलाशने का फैसला किया। इसी प्रयास के तहत उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और अब इसे एक टिकाऊ कृषि व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

करमजीत सिंह ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज (SBS) के निदेशक एवं NIDHI-TBI के प्रमुख अन्वेषक (PI) डॉ. रामनदीप सिंह के व्याख्यानों और मार्गदर्शन से प्रेरित होकर ड्रैगन फ्रूट की खेती का ऑन-फार्म मॉडल अपनाया।

डॉ. रामनदीप सिंह ने करमजीत सिंह की पहल और मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि में नवीन और आधुनिक तरीकों को अपनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने करमजीत सिंह को अपने कृषि उद्यम को मजबूत बनाने और उसका विस्तार करने के लिए संस्थागत एवं इनक्यूबेशन सहयोग का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

NIDHI-TBI की टीम ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गुरिंदर सिंह गिल और बिजनेस मैनेजर (BM) समीर गौतम के नेतृत्व में करमजीत सिंह का इनक्यूबेटर में पंजीकरण करवाने में सहायता की। टीम ने उन्हें NIDHI-TBI के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं और सहयोग के बारे में भी जानकारी दी।

इन सुविधाओं में तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप, नेटवर्किंग के अवसर और अन्य इनक्यूबेशन सेवाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उद्यमियों को अपने व्यवसाय को विकसित करने और उसका विस्तार करने में मदद करना है।

बांस की खेती और उत्पाद निर्माण में भी दिखाई रुचि

इस दौरान मानसा जिले के गांव खारा के संभावित उद्यमी चमकौर सिंह और संदीप सिंह ने भी NIDHI-TBI की टीम से बातचीत की। दोनों ने PAU के वानिकी विभाग के प्रमुख डॉ. जीपीएस ढिल्लों के मार्गदर्शन में बांस की खेती करने में रुचि दिखाई।

टीम ने उनके साथ बांस की खेती के लिए आवश्यक तकनीकी पहलुओं, इसकी संभावनाओं और बांस से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करके व्यवसाय विकसित करने के अवसरों पर चर्चा की।

संभावित उद्यमियों को NIDHI-TBI से जुड़े एक ऐसे उद्यमी से भी परिचित करवाया गया, जो बांस आधारित उत्पादों के निर्माण और विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। इस मुलाकात से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार बांस की खेती को मूल्यवर्धन और उद्यम विकास से जोड़ा जा सकता है।

किसानों के लिए नए कृषि उद्यमों की संभावनाएं

इन मुलाकातों से यह स्पष्ट होता है कि इनक्यूबेशन और संस्थागत सहयोग किसानों को खेती में विविधता लाने तथा नए व्यवसायिक अवसर तलाशने में मदद कर सकता है।

करमजीत सिंह, चमकौर सिंह और संदीप सिंह के अनुभव बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती, बांस उत्पादन और बांस आधारित उत्पादों के माध्यम से कृषि को नए उद्यमों से जोड़ने की संभावनाएं मौजूद हैं।

NIDHI-TBI, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से मेंटरशिप, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सुविधाओं, ज्ञान साझा करने और नेटवर्किंग के अवसरों के माध्यम से किसानों तथा नए उद्यमियों को नवाचारपूर्ण और टिकाऊ कृषि व्यवसाय विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है।

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